Friday, January 25, 2008

शिखर

ऑंखें में चमक रहती है,
दिल में कुछ अरमान रहते है,
ऊंचे ख्वाब देखो लोग कहते है,
पर अब तों ख्वाब ऊंचे ही आते है

नज़रें आसमान पे ही टिकी है,
उस शिखर की तलाश में रहते है,
जहाँ से आस्मां के पार दिखता है,
ठोकर खा कर गिर जाओगे लोग कहते है,
पर अब तों उड़ने की कोशिश हम करते हैं.

जोश में रहतें हैं,
किसी चीज से नही डरते है,
चोट खा जाओगे लोग कहते है,
पर हम तो मुस्करा के घाव भरा करते हैं.

हर पल को जीते है,
हमेशा बढ़ते रहते है,
थोरा सुस्ता लो लोग कहते है,
पर कर्मवीर आराम नही करते है.

निज लक्ष्य को भेद डालना है,
अज नही सुस्ताना है,
ठोकर से नही घबराना है,
शिखर पर तो उड़ कर ही जाना है

Cheers!!

Thursday, January 17, 2008

फिर मिलेंगे

मुस्कराहट,
जिसे में देखता रह गया,
मैं अपनी उलझने भूल गया,
एक टक उसे देखता रह गया,
सड़क के बीच में रुक गया,
खुद को भी भूल गया...

ऑंखें,
जिनमे मैं डूब गया,
गहरी गहरी सांसें भरने लगा,
मिर्जा ग़ालिब के शेर पढ़ने लगा,
खुद को उनमे ढूढने लगा,
इन्द्रधनुष उनमे मुझे दिखने लगा,
अपनी दुनिया उनमे ढूढने लगा,

जुल्फें,
हवाएँ जिनसे अट्खेलियन कर रही थी,
उनके लाल सुर्ख लाल गालों पे पड़ी थी,
हम दूर खडे हुए गुजारिश कर राहे थे,
की हवा जरा धीरे चल,
कहीं घटाएँ इस कदर ना छा जाएं,
की हम यहीं मदहोश हो जाएं..

वह शाम तो गुजर गयी,
आलम अब ये हो गया है,
की अकेले में हँसता हूँ,
याद उसी को करता हूँ,
बादलों में उनकी तस्वीरों को ढूद्ता हूँ,
उससे मिलने की फरियाद करता हों,
उसकी मुस्कराते हुए एक बार फिर देखने की हसरत रखता हूँ,

उस खुदा की खुदाई में भरोसा रखता हूँ,
दिल में बार एक ही ख्याल रखता हूँ,
की कहीं किसी मोड़ पे,
हम फिर मिलेंगे..

Friday, January 4, 2008

मोती
रास्ता ढूढ़ रही थी,
हवाएँ उनकी जुल्फों में,
जुल्फें भी मचल रही थी,
कभी आँखों पर,
कभी चेहरे पर,

वो झरोखे पे खडे थे,
न जाने किस सोच मी इस कदर डूबे थे,
होश नही था की पलकें भी नही झपकीं,
होश नही था की मुस्करा राहे थे वो,
मौसम भी धीरे धीरे बदलने लगा,
हवाएँ भी अब तेज़ हो गयी थी,
हलकी फुलकी चीजें अब उड़ने लगी थी,
मिटटी का एक कान उनकी आँखों में जा गिरा,
ओर पलकें झुक गयी,
एक टुकडा आंसू का,
गिर पड़ा आँखों से टूट कर,
उन्होने रोका उसे अपनी हथेली पर,
ओर बन कर लिया अपनी मुट्ठी मी,
ओर जब मुट्ठी खोली,
तो आंसू मिला नही,
पर एक सफ़ेद मोती नज़र आया,
शायद इसी के इन्तेज़ार में,
वह झरोखे पे खडे थे

मौसम बदलता है,
मुश्किलें आती है,
पर वह देके जाती है,
हर बार एक नया मोती,
एक अनमोल मोती.....