Monday, December 31, 2007

आओ

आओ निकल चले,
अज आसमान से आगे,

आओ आज दौडे,
समय से तेज़,

आओ सपने देखें,
इस दुनिया से बडे,

आओ देखें जरा,
बादलों के पार चमकती सूरज की किरणों को.

आओ ढूदे जरा,
अपने आप को.

आओ चल के देखे जरा,
उस उगते हुए सूरज को,

आओ मनाये नये साल को,
विदा करें पुराने साल को,

आओ करें कुछ ऐसा,
जो जीवंत रहे हमेशा…

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं…

3 comments:

Anonymous said...

Wish u too a very happy new year
.. badhiya kavita :)

Anonymous said...

who is crescenet.....nice poem main ise copy karoongi aur bhejungi....

Anonymous said...

it's me zeal...